#प्रेममयी_प्रेमग्रन्थ

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आप जानना चाहते हो न,
कि कितना प्रेम है आपसे??
तो सुनो…
मेरे प्रेम की तुलना राधा से मत करना,,
क्योंकि
मुझमे साहस नही है उन जैसा, कि आपको छोड़कर जी सकूँ,,
और
मीरा को भी मत रखिएगा, मेरे प्रेम की प्रतिद्वंद्विता में,,
क्योंकि
मुझे वैरागिन नही बनना,
मुझे आपकी जीवनसंगिनी बनकर, हर कदम साथ रहना है,,
और
वो स्थान चाहिए, आपके हृदय में,,
जहाँ मैं अंतिम साँस तक जीवन व्यतीत कर सकूँ…
माना,
स्वार्थी हूँ बहुत, और मेरा प्रेम भी आपके प्रेम की तरह त्याग,निस्वार्थ भाव से बुनी हुई कोई श्वेत चादर नही है,
पर,
मेरा प्रेम ,,
मेरी तरह ही ….नादान है, अनेक ऐसे स्वप्नों का आँचल है
जिसमे….
अपने भावों को वास्तविकता में सिंदूर के पवित्र रंग से भरने की चाह है,
और….
मंगलसूत्र के मोतियों के स्पर्श को,माला को अंतिम सांस तक धारण इच्छा।
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रचनाकार [{कवयित्री/कवि }]:- सुनिधि चौहान✍
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