क्या होगा जब हम साथ नहीं होगे???
काँप उठती हूं उस क्षण की कल्पना मात्र से ही......
इसलिए नहीं की मै कमजोर हूं
या मेरा प्रेम कम हो जाएगा.....
बल्कि ये सोचती हूं की
क्या कोई दे पाएगा वो अपनत्व जिसके आप हकदार हो????
क्या समझ पाएगा कोई आपकी चुप्पी जिसे मैं सुन पाती हूं???
क्या कोई होगा जो खुद से पहले मेरी तरह आपको रखेगा ???
क्या कोई मिलेगा ऐसा जो हर हां में हां मिलाएगा?????
क्या कोई होगा जो मेरी जान को अपनी जान से बढ़कर चाहेगा???
बस यही सब है जो दूर जाने से रोकता है
और फिर बांध देता है मुझे आपके प्रेम में......जीवनभर के लिए

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