हाँ !! वैर है मुझे,, 
     प्रेम की परछाई से
उसकी भावुकता भरी,,
     झूठी गहराई से......

नहीं शिकायत है अब,
      किसी इंसान जुदाई से....
हर सवाल है मेरा सिर्फ,, 
      ख़ुदा और उसकी खुदाई दे.....

क्यों किस्मत लिखी मेरी,,
      दर्द भरी सियाही से....
क्यों जोड़ा है वास्ता ,,
      हरदम मेरा रुसवाई से.....