#प्रेममयी_प्रेमग्रन्थ
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राधा नही हूँ,, मैं..
वियोग सह नही पाऊँगी
एक क्षण भी आपको,
नयनों से,,
ओझल देख,, नही पाऊँगी।।
वियोग सह नही पाऊँगी
एक क्षण भी आपको,
नयनों से,,
ओझल देख,, नही पाऊँगी।।
व्याकुल हो रहा है मन,
चंद पलों को ही आ जाओ,,
विरह की वेदना को,,
संयोग में,, ढाल जाओ।।
चंद पलों को ही आ जाओ,,
विरह की वेदना को,,
संयोग में,, ढाल जाओ।।
बेदम कर रही है,, तन को,
दुःख भरी ये, घड़ियाँ…।
करुणा में लिप्त,, मन को,,
शोकमयी अश्रुओं की, लड़ियाँ।।
दुःख भरी ये, घड़ियाँ…।
करुणा में लिप्त,, मन को,,
शोकमयी अश्रुओं की, लड़ियाँ।।
मिलने आओ कि मेरी कवितायें,,
आपको ही अब सिर्फ पुकारती है।
दुःख संताप में भी ये हृदय को,,
मिलन की आशाओं से बांधती है…।।
आपको ही अब सिर्फ पुकारती है।
दुःख संताप में भी ये हृदय को,,
मिलन की आशाओं से बांधती है…।।
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अगला अध्याय:- ( अध्याय-6 )
रचनाकार [{कवयित्री/कवि }]:- सुनिधि चौहान
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