तुम्हारी यादें.................... एक ऐसी दस्तक है
जिसे मैं चाहकर भी, अनसुना नहीं कर पाती.....
ऐसा भी नहीं है कि.......... मैं तुम्हें भूल नहीं पाती,
सच इतना सा है कि मैं तुम्हें भूलना ही नहीं चाहती
नहीं चाहती कि मेरी आँखों से वो ख़्वाब मिट जाए,,
तेरे संग गुजरी हर शाम के,, दिल से एहसास हट जाए ..
तुम्हें भूलकर मैं फिर से बुत बनना नहीं चाहती,
तुम्हारी यादों का कफ़न ,, बुनना नहीं चाहती।
तेरे संग गुजरी हर शाम के,, दिल से एहसास हट जाए ..
तुम्हें भूलकर मैं फिर से बुत बनना नहीं चाहती,
तुम्हारी यादों का कफ़न ,, बुनना नहीं चाहती।

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